रचनाकार

मेरे सपने मुझे अब सोने नहीं देते, कई रातों से मेरी नींद पूरी नहीं हुई

‘कुछ तो लोग कहेंगे’…
बृजेश गिरि

अमीरों सी मुझसे अमीरी नहीं हुई,
मिलने की कोई उनसे मजबूरी नहीं हुई।
मुझे अपने हालात पर रोना नहीं आया,
मुझसे किसी की जी हुजूरी नहीं हुई।
जिन्दगी से मुझको कुछ वक्त चाहिए,
कई ख्वाहिशें मेरी अभी पूरी नहीं हुई।
आज की तरह कभी हालात नहीं थे,
पहले कभी किसी से इतनी दूरी नहीं हुई।
कुछ देर तो ठहरो और फिर चले जाना,
कई बातें मेरी तुमसे जरूरी नहीं हुई।
मेरे सपने मुझे अब सोने नहीं देते,
कई रातों से मेरी नींद पूरी नहीं हुई।

09/07/2023

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