उत्कर्ष की मौत से संविधान का चौथा स्तंभ सदमे में, करछना बना अपराधियों का अड्डा, प्रशासन नाकाम
० प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा है अपराधियों का मनोबल।।
प्रयागराज। जिले की करछना तहसील में एक साल में दर्जनों घटनाएं हुई पर प्रशासन किसी भी घटना का पर्दाफाश नहीं कर सका। 31 दिसंबर को उत्कर्ष उम्र 18 वर्ष बी टेक छात्र की मौत जहां क्षेत्र की जनता कि दिल दिमाग पर शोक की लहर है वहीं प्रशासन पर बड़े बड़े सवाल भी खड़े कर रहे है। पंद्रह दिन तक एफ आई आर दर्ज न होना, प्रशासन की लापरवाही , निरसता या मिली भगत की शंका जाहिर कर रहा है। जबकि थानाध्यक्ष, पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को मिलकर लिखित सुचना दी गई।
वहीं एक तरफ अपराधियों का मनोबल बढ़ा रहा है प्रशासन पर जनता की गुपचुप राय यह भी मिल रही है कि प्रशासन भी बिक चुकी है, क्यों कि भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के सैकड़ों खबरों का असर न होना, पुलिस कमिश्नर के आश्वासन पर भी पुलिस को हरकत में न आना।जबकि प्रदेश के लगभग दो दर्जन अखबार व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,सोसल मीडिया से यह खबर चली है कुछ खबरें अन्य राज्य के अखबार व मिडिया ने चलाया है।लाखों लोगों की, प्रतिक्रिया, संवेदना व विश्वास खंडित होता दिख रहा है।यदि समाज का एक तबका समाज हित में जीवन दान कर रहा है उसके साथ प्रशासन की संवेदना या जांच न्याय नहीं तो सामान्य लोगों को तो न्याय की बात सोचना भी कपोल कल्पना है।यह है तीर्थराज प्रयाग की न्याय व्यवस्था।जो सभी को न्याय दिलाता, आज वह न्याय के लिए दर दर भटक रहा। वहीं सुबे के मुखिया ला एंड आर्डर का ढिंढोरा पिटते फिर रहे हैं।वाह रे राम राज्य।
मृतक का छाया चित्र देखने से स्पष्ट हो रहा कि ट्रेन से दुर्घटना होती तो कोई न कोई अंग कट पिट या चिथड़े हो जाते।पर सर पे प्रहार व पेट के बल लेटाना यह सिद्ध कर रहा है कि पैसा, मोबाइल लेकर , मार कर लेटाया गया,ताकि ट्रेन का बहाना बन सके। यदि ईमानदारी से जांच होगी तो अपराधियों के सबुत जरूर मिलेंगे।क्यों कि इतिहास गवाह है कि कितना भी शातीर अपराधी हो कुछ न कुछ सबुत जरूर छोड़ जाता है।अब इंतजार है प्रशासन अपना कलंक लगाकर मौन रहेगी या दुध का दुध पानी का पानी करेगी। इस घटना पर जल्द ही भारतीय किसान कल्याण संघ, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ एक बड़ा अभियान छेड़ेगा। या सरकार खुफिया एजेंसी से जांच करा कर इसका खुलासा करें।

