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हमेशा दहाड़ने वाले शख्स का यह कहना बोलने पर पाबंदी है! बिना बोले हर दर्द बयां कर गए मुख्तार

आनंद कुमार

मऊ। चेहरा बता रहा है जज्बात क्या है, जो कभी गरजते थे हालात क्या है, कांपती थी जिससे सियासत की चकाचौंध, मंजर बता रहा है दर्द क्या हैं। मुख्तार अंसारी जिसके नाम की बादशाहत का एक अलग अंदाज था, जिसके नाम पर पूर्वांचल ही नहीं उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में तथा उससे बाहर सियासत चलती थी। जिसे बाहुबली, माफिया, गुंडा पता नहीं किन-किन नामों से पुकारा और नवाजा जाता था। लेकिन जब वे मऊ के जनता की अदालत में जनप्रतिनिधि चुना गया तो उसकी दखल जनता की बदौलत लखनऊ सदन तक हो गई और वह माफिया से एक नेता बन गया। वे राजनीति के नई चाल की बदौलत अपने ऊपर लगे दाग को धुलना तो चाहता था, तभी तो एक बार नहीं पांच बार लगातार विधायक बन उन्होंने ये सिद्ध किया की मैं राजनीति में किसी से कम नहीं हू़ं। जब मुख्तार को छठवीं बार विधायक बनने का मौका आया तो वह स्वयं चुनाव न लड़कर अपनी सीट पर बेटे को जनता की अदालत की बदौलत आसीन कराने में सफलता पायी, और फिर साबित किया की मुख्तार की पकड़ सियासत में कमजोर नहीं है। शासन कानून से उसे चाहे जितना जकड़ ले, लेकिन मऊ की सियासत में वह मुख्तार है और मुख्तार ही रहेगा। विधानसभा 2022 के परिणाम तो कुछ ऐसे ही संकेत दिएं!


लेकिन वर्तमान का मुख्तार का जो दौर चल रहा है। जो उसके ऊपर बीत रहा है, उसके जो हालात हैं। वह मुख्तार तो है, लेकिन सब कुछ बदला-बदला सा है। और चेहरा साफ बता रहा है कि मुख्तार तो वही है लेकिन वह कमजोर हो गया है, शासन के चाबुक और प्रशासन की कठोर कार्रवाई से मुख्तार अंदर ही अंदर टूट गया है। कोई टूटेगा भी नहीं कैसे चारों तरफ से जिसके ऊपर कानून का वज्रपात पड़ रहा हो आखिर वह कर भी क्या सकता। भले ही वह मुस्कुरा कर मिल रहा है लेकिन उसके मुस्कुराहट के पीछे का दर्द साफ झलक रहा है!

It is forbidden to speak this saying of a person who always roars! Mukhtar said every pain without speaking

मुख्तार के चेहरे से दिख रही इस लाचारगी और बेचारगी में कुछ कमियां, कुछ गलतियां मुख्तार की तरफ से भी जरूर हुई होंगी कि ऐसे दिन आए हैं। कहीं ना कहीं कुछ कमियां और कुछ गलतियां सियासत से भी हुई होगी। जिसके शिकार मुख्तार अंसारी होकर आज वह मुख्तार बन गए हैं जिनके आगे पुलिस झुककर नहीं अब तन कर खड़ी होती है। ऐसे में इस मुख्तार की इस दशा-दिशा पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कठोर शासन भी कहा जा सकता है। और यह भी कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस शासन पर प्रशासन ने अपनी हर वह अंदाज को बदल दिया है जो मुख्तार के हित का था। वह सिर्फ और सिर्फ सत्ता के हित की बात अपने मुख्यमंत्री के हित की बात करने लगे हैं। खैर प्रशासन कितना ईमानदार है उसकी कार्यशैली कितनी ईमानदार है यह तो वही जानता है लेकिन सूबे का निजाम बदलने के साथ ही प्रशासन का मुख्तार को देखने का नजरिया और चश्मा बदल गया थोड़ी सी हास्यास्पद लगती है और थोड़ी सी बेशर्मी भरी लगती है। क्योंकि इससे यही तय होता है कि अगर मुखिया जो चाहता है प्रशासन उसके अनुसार काम करती है प्रशासन कानून के पालन के लिए जिस कर्तव्य धर्म और सत्य निष्ठा की शपथ लेती है वह स्वयं तन्हा अकेले नहीं कर सकती है। तभी तो आज मुख्तार के साथ जो हो रहा है इसमें प्रशासन की बौनी तस्वीर नजर आ रही है।
प्रशासन ही कभी रहा होगा जो मुख्तार के इशारे पर चलता रहा होगा, यही प्रशासन है जो मुख्तार के लिए पग पग पर कांटा बिछा रहा है। अगर मुख्तार के गलत कार्य और दौर के समय ही कानून ने अपना सही काम किया होता तो आज तस्वीर दूसरी होती।
वृहस्पतिवार को बांदा जेल से मुख्तार अंसारी को मऊ कोर्ट में लाया गया। यहां मुख्तार सहित तीन सहअभियुक्तों पर एमपी/ एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत फर्जी शस्त्र लाइसेंस देने के आरोप के मामले में 30 सितंबर 2022 को साक्ष्य के लिए एमपी/एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश दिनेश चौरसिया ने तिथि तय की है। लम्बे अरसे बाद पूर्व विधायक बाहुबली मुख्तार अंसारी जब अपने विधानसभा क्षेत्र मऊ की धरती पर अदालत में कदम रखने के लिए पुलिस की बख्तरबंद गाड़ी से नीचे उतरे तो भले सफेद कपड़े की सफेदी लकालक चमक रही थी, लेकिन चेहरे के तनाव, झुर्रियां और अवसाद साफ झलक रहे थे। पत्रकारों के सवाल पर जब मुख्तार से पूछा गया कुछ बोलेंगे तो हमेशा दहाड़ने वाले शख्स का मुस्कुरा कर यह कहना बोलने पर पाबंदी है! बोल कर सब कुछ बोल जाना है‌।

It is forbidden to speak this saying of a person who always roars! Mukhtar said every pain without speaking

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