रचनाकार

कच्चे धागे का पक्का रिश्ता

शब्द मेरे मीत…
डा. महिमा सिंह, लखनऊ उत्तर प्रदेश

देखो सावन सुहाना आया
रक्षाबंधन का त्यौहार लाया ।
सज गए बजार रंग-बिरंगी राखियों से लाल नीली पीली बहना के मन भाए,
बड़े प्यार से बहना राखी चुनकर लाए।
आयी सावन की पूर्णिमा पावन
लाती भाई बहन का पावन पर्व
रेशम के कच्चे धागो का
अटूट पावन बंधन मन में भैया की
खुशियों की अटल कामना‌।
रंग बिरंगे कच्चे धागो का है यह पक्का रिश्ता दिन साल महीने परवान यह चढ़ता।
बहना बांधे कच्चे धागे की गांठ निराली तीन ,
पहली गांठ की हो लंबी आयु भाई की,
दूजी गांठ की हो खुद की दीर्घायु ,
तीजी गांठ भाई बहन के
पावन रिश्ते की दीर्घायु के लिए।
तीनों गांठ का संबंध ब्रह्मा विष्णु महेश से।
आओ भर दे भैया की झोली अपने स्नेह आशीष से
भैया के मन जो भाए चुन-चुन के पकवान बनाए ,
रोली चंदन मीठा रख बहना राखी का, थाल सजाएं मन में भैया की सलामती, की दुआएं लिए भैया का इंतजार करें,
शुभ मुहूर्त देख तिलक कर भैया को आशीष हजारी देती बहना ‌।
हर दिल हर्षाया देखो
सखी सावन मास है आया
मेरा सबसे प्रिय त्यौहार है लाया
बचपन की सुहानी यादों में
फिर एक बार नया रंग
भरने का दिन आया।
भैया मेरा राजकुमार ,
चंदा सा सजीला,
थाल सजाऊ ,तिलक लगाऊ ,
लूं आरती उतार ,
भाई की कलाई पर
बांधू अपना प्यार।
रेशम के रंग बिरंगे कच्चे धागे ,
काटे सारे संकट मेरे भैया के।
रक्षाबंधन का पर्व अनूठा,
भाई बहन को लाता पास
जैसे चंदा तारे।
रह जाए ना भाई बहन
के बीच कोई दूरी
ईश्वर ने रचाया सुंदर त्यौहार
नाम दिया रक्षाबंधन।
हर भाई बहन को रहता है
पूरे साल इस पावन ,
पर्व का इंतजार !
मैं तो बांधूंगी इस
बार फूलों की राखी,
अपने भैया के हाथ ।
बांध के राखी भैया के
हाथ सज जाएंगे भाग बढ़ेंगे,
मैं भी इठलाती जाऊंगी
भैया की प्यारी बहना
कह लाऊंगी।
हम दोनों मिलकर
एक पेड़ लगाएंगे ।
बांध दूंगी राखी
उसको भी इस बार।
जब यह बड़ा हो जाएगा ,
इसकी शीतल छाया में ,
बैठेंगे भाई बहन एक साथ,
करेंगे मन की बातें।
तुम भी लगाओ इस बार
रक्षाबंधन पर एक पेड़,
दे दो उसको एक प्यारा सा नाम।

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