रचनाकार

मजा कहाँ?

शब्द मसीहा केदारनाथ…

वह अकेला बैठा हुआ अपनी बीवी के तानों के बारे में सोच रहा था। सोच क्या रहा था, बल्कि पूरी तरह से झल्ला रहा था। पता नहीं इस औरत को जरा-सा भी दिमाग है या नहीं, जब देखो तब मेरे पीछे पड़ी रहती है। कितना समझाता हूँ, लेकिन मजाल है कि कोई भी बात मान ले मेरी। आज भी अपनी मर्जी से मेरे लिए मैंगो शेक बनाकर ले आई। और उसे मैंगो शेक देते हुए बोली- ” मैंगो शेक पीने से और बाल काले करने से कोई जवान नहीं हो जाता है। बच्चों के साथ कंपटीशन करने से कोई फायदा नहीं।”

“तुम्हें क्या लगता है मैं पगला गया हूँ, बाल तो इसलिए काले करता हूँ ताकि जब तुम मेरे साथ चलो तो किसी को यह न लगे कि मैं बूढ़ा हो गया हूँ।”

“यह तो बहुत अच्छा बहाना है।” पत्नी ने कहा।

“तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मेरा ऐसा कहना बहाना है।”

“इस बुढ़ापे में अगर तुम जवान लगोगे तो कोई न कोई तो तुम पर छज्जे से कूद ही पड़ेगी, ऐसे ख्वाब देखना असली बुढ़ापे की निशानी है।”पत्नी ने हँसते हुए कहा।

“अच्छा…. और यह जो हर महीने तुम अपना फेशियल , मेनीक्योर, पैडीक्योर करवाती हो ये सब किस बात की तैयारी है। अब क्या बुढ़ापे में कोई और पसंद आने लगा है?”

“दिमाग में हार्पिक डालकर सफाई कर लो, जब देखो तब कुछ न कुछ तुम्हें उल्टा ही सूझता है। बना कर रख दिया है तुम्हारा काढ़ा …….. कितनी अजीब-सी बदबू आ रही है। कभी पेड़ की छाल उठा लाते हो, कभी पत्ते उठा लाते हो, कभी चूर्ण उठा लाते हो….. आखिर करना क्या चाहते हो।” पत्नी ने झल्लाते हुए कहा।

“कुछ करना नहीं चाहता, बस इतना ही चाहता हूँ कि जब तक तुम हो मैं पूरी तरह से फिट रहूँ।” उसने कहा।

“हाँ, तभी तो तुम मेरे उठने से पहले ही घर में पोछा मार देते हो, घर के बाहर झाड़ू मार देते हो, पौधों में पानी लगा देते हो, मशीन में कपड़े डाल देते हो, सब्जी काट कर रसोई में रख देते हो, कपड़े प्रेस करके रखते हो….. अरे नींद की गोली खा लिया करो। सुख से नींद आएगी तो अपने आप स्वास्थ्य ठीक रहेगा।” पत्नी ने कहा।

“सच कहूँ तो बात यह है कि तुम्हें सुबह ही नींद आती है। अब सुबह-सुबह उठकर तुम ये सारे काम करोगी तो मुझे अच्छा नहीं लगता। मैं तो जो कुछ भी करता हूँ, तुम्हें खुश रखने के लिए करता हूँ।” उसने कहा।

“तभी तो बहु कह रही थी…. पापा जी कुछ ज्यादा ही सठिया गए हैं।” पत्नी ने अपने हाथ नचाते हुए कहा।

“बहू को क्या पता, अभी उसका नया-नया प्यार है…. जब हमारी उम्र में पहुंचेगी तब पता चलेगा। अगर मेरे मरने के बाद उसे मेरी डायरी मिल गई, तब समझ पाएगी कि मोहब्बत क्या होती है। बीवी के कपड़े प्रेस करने का आनंद यह आजकल की पीढ़ी क्या जाने, तुम्हंम कोई परेशानी न हो इसीलिए तो मैं सुबह जल्दी उठ जाता हूँ, और तुम्हें लगता है कि बूढ़े को नींद नहीं आती है।” उसने कहा।

“तभी तो मैं तुम्हारे लिए मिस्सी रोटी पर कच्चा मक्खन लगा कर देती हूँ, हर रोज दही खाने में देती हूँ ताकि तुम्हें अच्छे से नींद आ जाय। आजकल के बच्चे कहाँ समझते हैं। उन्हें तो यह भी नहीं पता कि झगड़ा करने के लिए कोई वजह रहना जरूरी नहीं है।” पत्नी ने कहा।

“अच्छा, अब समझ आया कि तुम इतने सारे व्रतों में मेरे लिए लंबी उम्र की दुआ क्यों मांगती हो, जिंदगीभर मेरे प्राण खाने का पक्का इरादा कर लिया है तुमने।” उसने कहा।

“हाँ, और नाश्ते में, लंच में, डिनर में तुम्हारे सामने बैठकर तुम्हारे प्राण खाने की रोज दुआ मांगती हूँ। क्या कर लोगे मेरा?” पत्नी ने कहा।

“अब कोई कर भी क्या सकता है तुम्हारा। बस एक ही गलती की, इतनी बड़ी सजा झेल रहा हूँ, जिंदगी की बाजी मैं तुम्हारे संग खेल रहा हूँ। इस खेल को अधूरा छोड़ कर मत जाना।” उसने कहा।

“कहीं जाने वाली नहीं हूँ, जाऊंगी भी तो तुम्हारे सिर पर सवार होकर जाऊंगी।” पत्नी ने कहा।

“और अगर मैं ही पहले चला गया तो?”

“टांगे न तोड़ दूंगी, घर से तो बाहर निकलने नहीं देती हूँ, जिंदगी से कैसे बाहर जाने दूंगी?” पत्नी ने गुर्राते हुए कहा।

“इस बुढ़ापे में टांग टूट गई तो जुड़ेगी भी नहीं।”

“टांग टूट जाएगी तभी तो मुझे बदला उतारने का मौका मिलेगा। यह जो सुबह से लेकर शाम तक बिना कहे मेरा इतना ख्याल रखते हो। इस कर्म का भी तो पल मुझे इसी जीवन में चुकाना है।” पत्नी ने आंसू पोंछते हुए कहा।

कमरे के बाहर खड़ी हुई बहू पूरे वार्तालाप को सुनने के बाद सीधे रसोई में चली गई। आज सब कुछ बाबूजी की पसंद का बनाया था। उसे पता था कि जो बाबूजी को पसंद है वही तो उसके पति को भी पसंद है। आज उसे समझ आ गया था कि झगड़ने के लिए भी साथी का जिंदा रहना कितना जरूरी है। अधूरे जीवन से लड़ने में मजा कहाँ?

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