विधानसभा चुनाव 2022

मऊ में सियासी तापमान चरम पर, उम्मीदवारी बाकी

@ आनन्द कुमार…

मऊ। उत्तर प्रदेश में 2022 विधानसभा का चुनाव सर पर है कई चरणों के नामांकन, कई जनपदों में हो चुके हैं। लेकिन मऊ जनपद का चुनाव वैसे तो अंतिम चरण में है लेकिन अभी तक यहां पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अलबत्ता वृहस्पतिवार को सपा ने भाजपा से सपा में आए दारा सिंह चौहान को घोसी से टिकट देकर कई मजबूत दावेदारों को दिन में सपना दिखा दिया है। ऐसे में चट्टी-चौराहा व चाय-पान की दुकानों तक कौन प्रत्याशी होगा, किसकी सरकार बनेगी?, इसको लेकर सिर्फ जुबानी चर्चा है। हकीकत किसी को नहीं पता। वहीं नेता परेशान हाल हैं कि उनका क्या होगा, उन्हें टिकट मिल रहा है या नहीं, तो कुछ तो अपने टिकट को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। जनपद की 4 विधानसभाओं में बहुजन समाज पार्टी सभी सीट पर, कांग्रेस ने दो और आम आदमी पार्टी ने दो घोषित और दो अघोषित प्रत्याशी घोषित कर जनता जनार्दन के बीच मैदान में उतार चुकी है। वहीं घोसी से समाजवादी पार्टी ने दारा सिंह चौहान पर भरोसा जताया है। जो टिकट पा चुके हैं और जो नहीं वो भी उम्मीदवार अपने अपने पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं। तो वहीं कोई इसे अपना अंतिम चुनाव बताकर जनता की सिम्पैथी बटोर रहा है। मऊ सदर विधानसभा… मऊ के सदर विधानसभा की बात करें तो यहां का मुकाबला काफी दिलचस्प है। क्योंकि यहां पर लगातार पांच बार से विधायक हो रहे हैं मोख्तार अंसारी अंगद की तरह अपना पांव जमा कर, छड़ी के सहारे छठवीं बार सदन जाने की फिराक में हैं। तो बसपा अपने प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर की बदौलत, भाजपा और संघ मजबूत प्रत्याशी की तलाश है की बदौलत हर हाल में मोख्तार के राह में रोड़ा बन मोख्तार के एक और इतिहास को रोकना चाहती है। कांग्रेस भी सदर सीट के लिए अपना पत्ता अभी नहीं खोल रही है। वहीं आम आदमी पार्टी ने सदर से प्रभारी प्रत्याशी के रुप विक्रमजीत सिंह की घोषणा तो की है लेकिन अधिकृत घोषणा होना शेष है। यहां पीस पार्टी और आजाद पार्टी भी प्रत्याशी उतार सकती है। घोसी विधानसभा… बात घोसी विधानसभा की करें, तो यह सीट वर्तमान में भाजपा के पास है। लेकिन यहां पर भाजपा का कौन उम्मीदवार होगा यह संशय अभी तक बरकरार है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी यहां पर राजभर या फिर क्षत्रिय प्रत्याशी को मैदान में उतार सकती है। ऐसे में घोसी में समाजवादी पार्टी की चुप्पी वृहस्पतिवार को टूटी और पार्टी ने अपने दल के मजबूत दावेदारों को दरकिनार करते हुए भाजपा से सपा में आए दारा सिंह चौहान पर भरोसा जताते हुए साइकिल की सवारी दी है। कांग्रेस ने भी अभी तक अपना पता नहीं खोला है। केवल आप ने जिला पंचायत सदस्य पंकज भारती और बहुजन समाज पार्टी ने अपने प्रत्याशी विक्रम चौहान की बदौलत क्षेत्र में चुनावी गर्माहट को बना रखा है। सपा का प्रत्याशी घोषित होने के बाद घोसी को लेकर भाजपा अपना पत्ता अब जल्द खोलेगी। भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन में देरी का एक कारण यह भी बताया जा रहा था। मधुबन विधानसभा… वहीं बात मधुबन विधानसभा की करें तो वहां पर बसपा ने श्रीमती नीलम वर्मा को प्रत्याशी बनाकर पूरे जिले में अब तक सिंगल महिला प्रत्याशी दे कर महिलाओं को सम्मान दिया है। यहां कांग्रेस ने पूर्व विधायक अमरेश चन्द्र पांडेय को प्रत्याशी बनाकर मधुबन की राजनीति में अपने प्रत्याशी की बदौलत सपा-भाजपा व बसपा की राजनीति में रंग में भंग घोल दिया है। यहां अमरेश चन्द्र पाण्डेय जनता जनार्दन के बीच यह मेरा अंतिम चुनाव कहकर सबसे बुजूर्ग प्रत्याशी होने व मतदाताओं पर अच्छी पकड़ रखने का इमोशनल कार्ड खेलकर, कांग्रेस का तापमान बढ़ा रखे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने कमलेश कुमार द्विवेदी को मैदान में उतारकर जनता जनार्दन के बीच हलचल बढ़ा दिया है। ऐसे में मधुबन सीट समाजवादी पार्टी, भाजपा के गठबंधन में जाएगी या इनके उम्मीदवार स्वयं यह मैदान में होंगे कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। वैसे तो सपा, भाजपा में प्रत्याशियों की यहां कोई कमी नहीं है लेकिन बाहरी प्रत्याशी के नाम पर जनता कुछ ठिठक सी जा रही है। मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित विधानसभा… कांग्रेस ने अपने पुराने साथी बनवारी राम पर भरोसा जताकर बुजुर्ग प्रत्याशी को मैदान में उतार एक बार फिर सपा, बसपा और भाजपा के प्रत्याशियों के लिए कड़ी टक्कर का संकेत दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी अपने प्रभारी/प्रत्याशी अंकित राव को क्षेत्र में भेज दिया है, तथा बहुजन समाज पार्टी ने धर्म चंद्रा पर विश्वास जताया है। ऐसे में मुहम्मदाबाद में भी कौन सपा, भाजपा का प्रत्याशी होगा अभी सस्पेंस बना हुआ है। यहां पर भी सपा व बसपा के पास टॉप थ्री के कई उम्मीदवार हैं लेकिन किस पर भरोसा किया जाए किस पर नहीं सभी दल संशय में हैं। राजनीति के रण में अंतिम क्षण तक मऊ में नेता बागी बन सकते हैं… वैसे चुनाव की तारीखें घोषित होने से पहले बहुत से नेता इस दल से उस दल में अपनी-अपनी टिकट व जीत की जुगाड़ को लेकर जा और आ चुके हैं। टिकट की घोषणा होते-होते कुछ नेताओं के मन मुताबिक नहीं हुआ तो मऊ सदर, घोसी, मधुबन व मुहम्मदाबाद गोहना में सपा, भाजपा में यह आशंका है कि राजनीति के रण में अंतिम क्षण तक नेता बागी बन सकते हैं या दूसरे दल का दामन थाम सकते हैं। वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि सभी दलों के उम्मीदवार घोषित होने के बाद भी कुछ प्रत्याशी को बदल कर दूसरे चेहरे को मैदान में उतारा जा सकता है।

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