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कोरोना महामारी की वजह से सिद्धपीठ पर गुरुपूर्णिमा का आयोजन स्थगित, घर से ही करें श्रद्धालु गुरुपूजा : महामंडलेश्वर

(श्रीराम जायसवाल)
गाजीपुर। गुरु शिष्य के अटूट संबंध के पावन पर्व गुरु पूर्णिमा पर प्रख्यात सिद्धपीठ श्री हथियाराम मठ पर आयोजित होने वाले समारोह को लोक कल्याण को ध्यान में रखते हुए स्थगित कर दिया गया है। सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर व जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि वर्तमान समय में चल रहे वैश्विक महामारी कोरोना के मद्देनजर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मानव कल्याण के लिए यह निर्णय लिया गया है।
शिष्य श्रद्धालुओं को यह संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से परंपरागत होने वाली गुरु पूजा को इस वर्ष मानव कल्याण के निमित्त सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर सांकेतिक रूप से किया जाएगा। जिसमें सिद्धपीठ से जुड़े शिष्य श्रद्धालुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। लोग अपने-अपने घरों से ही गुरु की प्रतिमा रखकर पूजन अर्चन करें व गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को धन्य बना सकेंगे।
गौरतलब हो कि 650 वर्ष प्राचीन सिद्ध पीठ हथियाराम मठ पर गुरु पूर्णिमा के दिन देश के कोने-कोने से शिष्य श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है जहां दिनभर पूजन अर्चन के साथ ही भंडारे प्रसाद का आयोजन भी किया जाता है।
विशेष भेंटवार्ता के दौरान महामंडलेश्वर श्री यति जी महाराज ने कहा कि वर्तमान दौर में मानव जीवन पर संकट मंडरा रहा है। ऐसे में सभी धर्मावलंबियों को मानव धर्म का पालन करना नितांत आवश्यक है। जिसके तहत अपने धर्म के अनुष्ठानों को सांकेतिक रूप से आयोजित कर मानव धर्म का पालन किया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के दिन उनके द्वारा उनके ब्रह्मलीन गुरुदेव महामंडलेश्वर बालकृष्ण जी महाराज सहित ब्रह्मलीन 25 पूर्व पीठाधीपतियों सहित सभी संत महात्माओं का पूजन अर्चन कर आशीर्वाद लिया जाएगा। लेकिन सामाजिक दूरी का पालन करते हुए इस कार्यक्रम में शिष्यों का प्रवेश निषेध रहेगा।

चातुर्मास महायज्ञ अनुष्ठान होगा, समारोह नहीं
गाजीपुर। सिद्धपीठ हथियाराम मठ द्वारा प्रतिवर्ष सावन भादो चौमास में होने वाले चातुर्मास महायज्ञ अनुष्ठान को भी सांकेतिक तौर पर किया जाएगा।
जानकारी देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि सिद्धपीठ की परंपरा अनुसार प्राचीन काल से चले आ रहे चातुर्मास महायज्ञ अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। लेकिन इस अनुष्ठान में भी सिद्धपीठ पर कोई सामूहिक भीड़ नहीं होगी। उन्होंने बताया कि बरसात के चौमासे में जीव कल्याण निमित्त प्राचीन काल से सनातन धर्मावलंबियों द्वारा एक स्थान पर प्रवास कर चातुर्मास व्रत का आयोजन किया जाता है। जिसका पालन उनके द्वारा भी लगातार द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर संपन्न होने के बाद सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर किया जाता रहा। जिसमें लगातार दो माह तक आषाढ़ पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमा तक अति रूद्र महायज्ञ सहित तमाम अनुष्ठान होते रहे। जिसमें लोगों की काफी भीड़ होती रही है। लेकिन इस वर्ष उनके द्वारा तमाम धार्मिक अनुष्ठान संपादित किए जाएंगे जिसमें शिष्य समुदाय को उपस्थित होने से स्पष्ट रुप से मना कर दिया गया है।

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