पॉलीथिन पर पूर्णतः पाबन्दी ?… सुन के हंसी भी आती है और गुस्सा भी…?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में 15 जुलाई से पॉलिथीन बैन किए जाने के कानून लागू होने के बाद जहां लोग सरकार के इस फैसले के समर्थन में इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। वही सोशल मीडिया पर इन दिनों एक SMS खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस SMS में छोटे दुकानदारों के समर्थन में बात लिखी गई है। SMS में लिखा गया है कि अगर सरकार पॉलिथीन बैन करना ही चाहती है तो अच्छी बात है, लेकिन सरकार को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि छोटे दुकानदार तो पालीथीन का प्रयोग बंद कर देंगे, बंद नहीं करेंगे उनके ऊपर कठोर कानून के तहत कार्यवाही होगी। लेकिन सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि दुकानदार तरल पदार्थ आखिर किसमें देंगे सरकार को यह भी बताना पड़ेगा। छोटे दुकानदारों द्वारा अगर पालिथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी जाती है तो पूरे देश में जो उत्पाद छोटे से लेकर नामी गिरामी कंपनियों के आते हैं वह किस टाइप के पैक में आएंगे और अगर वह आते हैं तो क्या वह पर्यावरण के लिए खतरा नहीं है सरकार उनको नष्ट करने के लिए क्या उपाय लगाएगी। या छोटे दुकानदारों पर सरकार कार्यवाही तो करेगी इन बड़ी कम्पनियों का क्या होगा।
क्या वायरल हो रहा है पढ़े पूरा SMS…
मैं भी कोई पालीथीन का समर्थक नहीं हूं परन्तु इस कानून के तहत किस पॉलीथिन को हटाया जाएगा ? मुझे निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चाहिए…
*कुरकुरे की पैकिंग बदली जाएगी या अंकल चिप्स की? या किसी और बड़ी कम्पनी की ? जैेसे अमूल, केडबरी,पारले,ब्रिटेनिेया, ??*
*हिन्दुस्तान लिवर के शैम्पु,सोप,बिस्किट के प्लास्टिक रैपर नहीं चलने देंगे?*
*जी नही …..😡 इसमें तो सिर्फ आम दुकानदार या गरीब रेहड़ी वाले ही पिसेंगे इस सरकारी चक्की में।*
*इसको लागू करने से पहले कोई वैकल्पिक साधन नही सुझाया गया।*
*कैसे कोई समोसे लेने गया व्यक्ति चटनी कपड़े के थैले में डाल के घर लाएगा ??*
*ऑफिस से घर आता व्यक्ति दही को क्या अपनी जेब में डाल के लाएगा?*
*कहने का तातपर्य ये है की इस पाबन्दी से सिर्फ घरेलू दुकानदार ही तबाह होंगे । हलवाई का सबसे ज्यादा नुकसान होगा। गृह उद्योग बंद हो जाएंगे,पापड़,चकली,फरसाण बनानेवाले क्या करेंगे ? क्यो की हल्दीराम,बालाजी की पैकिग पे तो कोई पाबंदि नही होगी।*
*गरीब का घर जब बरसात में गले तो, गरीब क्या करे??*
*बेकरी प्रौडक्ट- याने ब्रेड,खारी, टोस्ट,बिस्किट,पाव जो महाराष्ट्र की पहचान है,, अब ये लगभग महाराष्ट्र के 13 हजार बेकरी वाले क्या करे?*
*विदेशी पिज़्ज़ा और बर्गर के साथ तो सॉस के पाउच दे दिए जाएंगे पॉलीथिन के (जिन पे कोई पाबन्दी नही)।*
*लेकिन आम दुकान दार जिसको खुद की बनाई हुई सब्जी या चटनी बेचनी है वो क्या करेगा??*
*आमूल का दही, मखन और घी भी सब पॉली पैक में आते हैं फिर ग्राहक तो अपनी सुविधा को देखते हुए लोकल सामान नही खरीदेगा*
*इस पर फिर से विचार होना जरूरी है।*
*या तो इसे पूरी तरह से लागू करो चाहे नुक्कड़ की हलवाई की दुकान हो या मल्टीनेशनल कम्पनी। पॉलीथिन पर पाबन्दी मतलब पूरी पाबन्दी नही तो make in india तो जब होगा तब होगा अभी तो गाज गिरेगी तो सिर्फ और सिर्फ गरीब व्यापारी पर ही।*
*अपने शहर के एक आम गरीब व्यापारी को बचाने के लिए उसे समर्थन दिजिये।* ✍.. 🅿♍•┈┈✤┈┈┈••✦👏

