“विकास की दौड़ में मऊ का यह जर्जर अस्पताल भवन कहीं बड़ा विनाश न बन जाए!”
@आनन्द कुमार
चलिए भाई, ट्रेन तो चल दी जहाँ जानी थी! अब इसका रोज़ का आना-जाना लगा रहेगा।
विकास किसने किया, अगर किसी एक का नाम लें तो दूसरे के साथ बेमानी होगी। इसलिए विकास की जय-जय!
लेकिन विकास की बातें बाद में… आइए मऊ में एक संभावित विनाश को रोकने की बात कर लें।
इसकी ज़िम्मेदारी सबकी है — चाहे सांसद राजीव राय हों, यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा हों, अन्य जनप्रतिनिधि हों, जिलाधिकारी मऊ हों या मुख्य चिकित्सा अधिकारी मऊ। और अगर इन सबसे भी यह काम न हो पाए, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को स्वयं पहल करनी चाहिए।
ज़रा इस भवन को गौर से देखिए। यह जिला महिला चिकित्सालय मऊ का पुराना भवन है। इसके ठीक सामने भाजपा और सपा के ज़िम्मेदार नेता भी बैठते हैं। इसी जर्जर भवन के बगल से रोज़ सैकड़ों महिला मरीज, गर्भवती महिलाएँ, मासूम बच्चे, स्कूली छात्र-छात्राएँ, आम नागरिक, पुलिसकर्मी और अन्य अधिकारी गुजरते हैं।
अब सोचिए, अगर यह भवन कभी भी गिर जाए तो मंजर कितना भयावह होगा!
मऊ के ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से निवेदन है कि विकास की प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ इस विनाश का कारण बन चुके जर्जर भवन की ओर भी ध्यान दें, ताकि कोई बड़ा हादसा होने से पहले इसे रोका जा सके।


