मऊ सीट पर एक बाहुबली के नाम पर दूसरे बाहुबली की एंट्री क्यों?
@ आनन्द कुमार
यह बाईपास सर्जरी है या मऊ में एक पेस मेकर निकालकर दूसरा पेस मेकर लगाने का कोई इमरजेंसी ऑपरेशन, जो प्रयोग सिर्फ मऊ के लोगों पर ही किया जा रहा है! यह तो राम ही जाने! हम क्या जाने!
मऊ से बाहुबली बृजेश सिंह या उनके परिवार से कोई आकर सम्भावित उपचुनाव लड़ेगा ऐसा कई दिनों से कुछ मीडिया द्वारा बताया जा रहा है! सूत्र भी ऐसा ही कह रहे हैं!
सच क्या है अभी स्पष्ट नहीं है! लेकिन जो भी बातें अब्बास अंसारी की विधानसभा की सदस्यता जाने के बाद सामने आ रही है। यह किसी फ़िल्म की पटकथा तो नहीं है लेकिन यह सच है की सारा खेल पर्दे के पीछे गढ़ा और जैसी आवश्यकता है वैसी जनता के बीच ज़रूरत मुताबिक़ पढ़ा जा रहा है!
वैसे तो सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने जिस दिलेरी से माफिया बृजेश सिंह से अपने सम्बन्ध को ज़ाहिर किया है! साथ ही अन्य बाहुबलियों से अपने अच्छे रिश्ते बताया है! बाहुबली मुख्तार अंसारी से उनके राजनैतिक एवं अन्य सम्बन्ध तो पहले से ही जगजाहिर है! वैसे जिस दिलेरी के साथ ओमप्रकाश राजभर ने अपनी बात कही है वर्तमान के राजनैतिक परिदृश्य में यह बात कहने की हिम्मत सभी में नहीं है! या तो लोग ऐसे लोगों से रिश्ता बताने में बचते हैं या पर्दे के पीछे से खेल खेलते हैं!
मऊ सदर विधानसभा का उपचुनाव का कोई समीकरण स्पष्ट नहीं है! अब्बास अंसारी विधायकी बचाने के लिए अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में दस्तक दे चुके हैं! अंसारी परिवार देश के बड़े अधिवक्ताओं की शरण में हैं, अपने बचाव को लेकर! अब्बास के चाचा व गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी की सदस्यता जाने के बाद अदालत से ही बची थी! ऐसे में मऊ में उपचुनाव को लेकर नूरा कुश्ती जारी है!
भाजपा के लोग किसी भी क़ीमत पर यह चाहते हैं की यह सीट उनकी पार्टी को मिले और मऊ का लोकल प्रत्याशी हो! सुभासपा अपने दावे पर अडिग है! वह चाहती है 2017 व 2022 में मऊ सदर सीट उसके पास था तो उपचुनाव में भी हक उसी का है!
लेकिन जो बातें समझने वालों को समझ में नहीं आ रही है, वह यह है कि आखिर मऊ सदर सीट पर एक बाहुबली के नाम पर दूसरे बाहुबली की इंट्री क्यों?
चर्चा है कि बृजेश सिंह या उनके परिवार के किसी सदस्य की मऊ की राजनीति में इंट्री बाया सुभासपा सिर्फ और सिर्फ एक प्रयोग है! इसके पीछे जो रूपरेखा तय है उसके पीछे कहीं ना कहीं भाजपा की रज़ामंदी भी है! लेकिन यह बातें तो सूत्रों की है हकीकत क्या है कोई नहीं जानता!
ओमप्रकाश राजभर ने जिस दिलेरी के साथ बृजेश सिंह को अपना बताया, मऊ की जनता भाजपा के यूपी और देश के नेताओं से यही जानना चाहती है की क्या! मऊ सदर सीट अगर उन्होंने गठबंधन धर्म के नाते सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी को दिया! और ओमप्रकाश राजभर ने अगर बृजेश सिंह या उनके परिवार को छड़ी के सहारे खड़ा किया! तो क्या भाजपा अपने कमल के फूल को सुभासपा के प्रत्याशी पर बरसाएगी! उनके लिए वोट माँगेगी या कहेगी हम किसी भी माफिया के साथ नहीं रहेंगे! या फिर कहेगी यह सीट गठबंधन धर्म में ओमप्रकाश राजभर के पाले में है। उनकी मर्जी है वे किसको सीट दें हम तो सिर्फ गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं! लेकिन जनता जानना चाहती है! कि मऊ उपचुनाव अगर होता है तो किस दल का क्या रूख है स्पष्ट करे। केवल मऊ का तापमान पढ़ने की कोशिश ना करें नहीं तो इस बार जनता अपना बुख़ार देने के पक्ष में भी दिखाई नहीं दे रही है!
मऊ से बाहुबली बृजेश सिंह या उनके परिवार से कोई आकर सम्भावित उपचुनाव लड़ेगा ऐसा कई दिनों से कुछ मीडिया द्वारा बताया जा रहा है! सूत्र भी ऐसा ही कह रहे हैं!
सच क्या है अभी स्पष्ट नहीं है! लेकिन जो भी बातें अब्बास अंसारी की विधानसभा की सदस्यता जाने के बाद सामने आ रही है। यह किसी फ़िल्म की पटकथा तो नहीं है लेकिन यह सच है की सारा खेल पर्दे के पीछे गढ़ा और जैसी आवश्यकता है वैसी जनता के बीच ज़रूरत मुताबिक़ पढ़ा जा रहा है!
वैसे तो सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने जिस दिलेरी से माफिया बृजेश सिंह से अपने सम्बन्ध को ज़ाहिर किया है! साथ ही अन्य बाहुबलियों से अपने अच्छे रिश्ते बताया है! बाहुबली मुख्तार अंसारी से उनके राजनैतिक एवं अन्य सम्बन्ध तो पहले से ही जगजाहिर है! वैसे जिस दिलेरी के साथ ओमप्रकाश राजभर ने अपनी बात कही है वर्तमान के राजनैतिक परिदृश्य में यह बात कहने की हिम्मत सभी में नहीं है! या तो लोग ऐसे लोगों से रिश्ता बताने में बचते हैं या पर्दे के पीछे से खेल खेलते हैं!

मऊ सदर विधानसभा का उपचुनाव का कोई समीकरण स्पष्ट नहीं है! अब्बास अंसारी विधायकी बचाने के लिए अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में दस्तक दे चुके हैं! अंसारी परिवार देश के बड़े अधिवक्ताओं की शरण में हैं, अपने बचाव को लेकर! अब्बास के चाचा व गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी की सदस्यता जाने के बाद अदालत से ही बची थी! ऐसे में मऊ में उपचुनाव को लेकर नूरा कुश्ती जारी है!
भाजपा के लोग किसी भी क़ीमत पर यह चाहते हैं की यह सीट उनकी पार्टी को मिले और मऊ का लोकल प्रत्याशी हो! सुभासपा अपने दावे पर अडिग है! वह चाहती है 2017 व 2022 में मऊ सदर सीट उसके पास था तो उपचुनाव में भी हक उसी का है!
लेकिन जो बातें समझने वालों को समझ में नहीं आ रही है, वह यह है कि आखिर मऊ सदर सीट पर एक बाहुबली के नाम पर दूसरे बाहुबली की इंट्री क्यों?
चर्चा है कि बृजेश सिंह या उनके परिवार के किसी सदस्य की मऊ की राजनीति में इंट्री बाया सुभासपा सिर्फ और सिर्फ एक प्रयोग है! इसके पीछे जो रूपरेखा तय है उसके पीछे कहीं ना कहीं भाजपा की रज़ामंदी भी है! लेकिन यह बातें तो सूत्रों की है हकीकत क्या है कोई नहीं जानता!
ओमप्रकाश राजभर ने जिस दिलेरी के साथ बृजेश सिंह को अपना बताया, मऊ की जनता भाजपा के यूपी और देश के नेताओं से यही जानना चाहती है की क्या! मऊ सदर सीट अगर उन्होंने गठबंधन धर्म के नाते सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी को दिया! और ओमप्रकाश राजभर ने अगर बृजेश सिंह या उनके परिवार को छड़ी के सहारे खड़ा किया! तो क्या भाजपा अपने कमल के फूल को सुभासपा के प्रत्याशी पर बरसाएगी! उनके लिए वोट माँगेगी या कहेगी हम किसी भी माफिया के साथ नहीं रहेंगे! या फिर कहेगी यह सीट गठबंधन धर्म में ओमप्रकाश राजभर के पाले में है। उनकी मर्जी है वे किसको सीट दें हम तो सिर्फ गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं! लेकिन जनता जानना चाहती है! कि मऊ उपचुनाव अगर होता है तो किस दल का क्या रूख है स्पष्ट करे। केवल मऊ का तापमान पढ़ने की कोशिश ना करें नहीं तो इस बार जनता अपना बुख़ार देने के पक्ष में भी दिखाई नहीं दे रही है!


हम सभी मऊ सदर विधानसभा के लोगों का भाग्य में केवल दुर्भाग्य ही लिखा है। सांप नाथ से गला छूटेगा तो नागनाथ गले में पड़ जाएंगे । हे भगवान हम लोग को बचाइए माफिया गैंग से और कोई शुद्ध राजनीतिक व्यक्ति को विधायक बनाइए ।