रचनाकार

हैलो ! मैं अयोध्या बोल रही हूं…

मेरी कलम से…
आनन्द कुमार

अरे रुको, कौन होते हो तुम,
अयोध्या के बारे में कुछ कहने वाले,
तुम सुनो चुपचाप, मैं अयोध्या हूं,
मैं अयोध्या बोल रही हूं,
मैं राम की जन्म भूमि हूं,
मैं मर्यादा की माटी हूं,
मैं धर्म की छाती हूं,
तुम मेरे बारे में,
कुछ भी कहने से पहले,
तुम मुझको जानो,
मेरी सत्यता को पहचानो,
मेरे सत्यार्थ का गला ना घोंटो,
मुझे पता है,
अयोध्या की मिट्टी की क़ीमत,
तुम इसका मूल्यांकन ना करो,
तुम कौन होते हो,
अयोध्या के लोगों का मोल भाव करने वाले,
तुम अपनी हद में रहो,
तुम अपनी जद में रहो,
अयोध्या के जर्रे-ज़र्रे में राम हैं,
भारत की संस्कृति व सभ्यता में राम हैं,
इसकी तुलना तुम वोट से ना करो,
जो वोट दिया वह भी राम है,
जो वोट ना दिया वह भी राम है,
यही राम की पहचान है,
यही राम की, आन, बान व शान है,
राम मानवता है, राम सहनशीलता है,
राम जीवन्तता है, राम अनंत है,
राम को तुम राजनीति से दूर रखो,
राम की अयोध्या को तुम,
गंदी मानसिकता से दूर रखो,
जनता ने सिर्फ़ सांसद चुना है,
यह लोकतंत्र की प्रक्रिया है,
यह होता रहा है, होता रहेगा,
अयोध्या का राजा राम है,
भारत का राजा श्रीराम है,
सदियों से है और सदियों तक रहेगा,
इसलिए तुम अयोध्या को बदनाम ना करो,
अयोध्या राम है, राम अयोध्या है,
इसलिए अयोध्या को राम ही रहने दो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *