अपना जिला

आसान नहीं है ‘राजीव’ का ‘कल्पनाथ’ होना..…

संजय दुबे ( वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार )

• सुधा राय ने स्वयं बनाया है राजनैतिक वारिस
• बड़ी है जिम्मेदारी, कैसे पूरी होगी जनता की आस

घोसी लोकसभा की बात बिना कल्पनाथ राय के अधूरी है। मऊनाथ भंजन को नगर से तहसील और मऊ को जिला बनाने से लगाये बड़ी रेल लाइन, जनपद के कलेक्टर से लेकर पुलिस कप्तान के कार्यालय सहित सभी विभागों के कार्यालय व आधुनिक टेलीफोन एक्सचेंज, तीन ओवर ब्रिज सहित ज़िलें की शानदार बिल्डिंगो की तामीर का तमगा कल्पनाथ राय के नाम ही है। अगल बगल के कई ज़िलों में और भी मशहूर नेता हुए पर विकास के पर्याय के लिए सिर्फ़ पूर्वांचल में इन्हीं का नाम लिया जाता है। आजमगढ़ से कांग्रेसी सरकार में सूबे के मुख्यमंत्री तक हुए पर विकास के कार्य में तेजी वहां समाजवादी सरकार के गठन और मुलायम परिवार के चलते ही दिखी । गाज़ीपुर, बलिया अभी तक काफ़ी मामलों में पीछे ही है। फ़िलहाल ,सूरते हाल ये है कि आज़मगढ़ अगल बगल के सभी ज़िलों में सबसे ज्यादा तरक्की की राह पर है।

संजय दुबे

इंडी गठबंधन से यहां सपा के राजीव राय चुनाव जीते हैं। इनके चुनाव प्रचार के दौरान बुलायी गयी एक मीटिंग में सुधा राय, पत्नी दिवंगत कल्पनाथ राय, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने बड़े ही भावुक रूप से सम्बोधन में राजीव राय को अपने बेटे और कल्पनाथ राय के राजनैतिक वारिस के रूप में सम्बोधित किया था । राजीव राय ने भी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाने का वादा भी किया हैं। अब,सवाल ये है कि ज़ब 4 जून को राजीव राय चुनाव जीत चुके हैं और उन्हें सांसद होने का जनता ने आशीर्वाद दे दिया है तब, आगे उनके विकास कार्यक्रम की क्या रूपरेखा होगी? कैसे योजनाओं का इस क्षेत्र में धरातल पर लाया जायेगा? उनके क्रियान्वयन का ले आउट क्या होगा? ये सब देखने की बात होगी। क्योंकि इसे संयोग कहें या कल्पनाथ राय का प्रभाव, सत्ता हमेशा से घोसी क्षेत्र पर तब ही मेहरबान रही। ज़ब तक कल्पनाथ राय यहां से एमपी चुने जाते रहें। कल्पनाथ राय का विकास के प्रति सम्यक दृष्टिकोण और माकूल केंद्र सरकार के सकरात्मक प्रभाव से घोसी को वो सब कुछ मिला जिसे आप राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक का कह सकते हैं। जिनमें से कई दुर्भाग्यवश योजनाएं अन्यत्र चली गयी। दूरदर्शन केंन्द्र बंद हो गया। ये उस समय का पूर्वांचल में सबसे आधुनिक था। गन्ना अनुसंधान केंद्र, ज़ो,ब्राज़ील के विकसित अनुसंधान केंद्र के समकक्ष था। यहां,गन्ना ही नहीं उसकी लुगदी पर भी शोध की व्यवस्था थी। इसको भी यहां से अन्यत्र भेज दिया गया। गनीमत ये रही कि इसके बदले मऊ को बीज अनुसन्धान और सूक्ष्मजीवी अध्ययन केंद्र मिला। जिस समय टेलीफोन एक्सचेंज का निर्माण हुआ उस समय की सबसे नयी और शानदार तकनीक का इसमें प्रयोग हुआ। काफ़ी अरसे तक मऊ तीन ओवरब्रिज वाला सूबे का एकलौता शहर रहा। ख़ास बात ये कि मऊ के तीनों ओवरब्रिज काफ़ी खूबसूरत हैं। मऊ से गोरखपुर एनएच 29 पर भीटी से आगे वाले ओवरब्रिज की डिजाइन दिल्ली में बने एक खूबसूरत ओवरब्रिज की हूबहू कॉपी हैं। वो पुल दिवंगत राय को बहुत पसंद था। इसलिए वैसा ही पुल मऊ में बना।आज़ भी समूचे पूर्वांचल में इतना सुन्दर ओवरब्रिज नहीं हैं। रात को ली गयी इसकी तस्वीर इतनी शानदार होती हैं कि आप अगर न जानें तब मानेंगे ही नहीं कि ये मऊ का ओवरब्रिज है। रेलवे स्टेशन की डिजाइन भी अपने आप में एक मिसाल है। ज़िलें के कलेक्टर, एसपी सहित अन्य सरकारी आवास भी किसी अन्य पुराने मऊ के ज़िलों से काफ़ी शानदार है। अभी तक इसके बाद ज़ो नये जनपद बने उनके सरकारी बंगलो, आवास का निर्माण आज़ तक इससे बेहतर नहीं है।सिर्फ़ जिला अस्पताल ही एक ऐसी इमारत है, जिसको वो जितना आधुनिक स्तर का बनाना चाहते थे वैसा बन नहीं पाया। अब सवाल ये है कि ज़ब जनता को कल्पनाथ राय इतने पसंद थे, है तब उसने आज़ तक वैसे नेता को खोजा क्यों नहीं? उनके परिवार तक को नकार दिया। ऐसा भी नहीं कि राजनैतिक दलों ने इस परिवार पर भरोसा नहीं किया। कांग्रेस,जदयू, समता पार्टी, सभी ने राय परिवार पर भरोसा किया मग़र अफ़सोस जनता ने किसी भी परिवार के सदस्य पर अपना भरोसा नहीं जताया। इनके इतर जनता ने ऐसे ऐसे नुमाइंदे चुनें जिन्हें, अपने बीच उसे देखना तक भी नसीब नहीं हुआ।
अबकी, सपा ने ज़ो उम्मीदवार उतारा है काफ़ी सोच समझ कर टिकट दिया है। इनके टिकट कटने की भी चर्चा काफ़ी उड़ायी गयी पर वो अफवाह से ज़्यादा नहीं साबित हुई।खैर! राजीव राय अब चुनाव जीत चुके हैं। जिसने इनको वोट दिया उसके भी और जिनने खिलाफ़त में दिया उसके भी, सबके सांसद हो चुके हैं।
ऐसे में इनसे जनता को काफ़ी अपेक्षाएं है। उसे, लगता है कि उनका नुमाइन्दा एक अरसे के बाद उनके बीच का है। जिससे उसे मिलने में सहूलियत हो सकती है। उनसे वो हर्ज – गर्ज कह सुन सकती है। उससे मिलने के लिए जनता को किसी ‘वाया ‘ की जरुरत नहीं होगी। ये उसको सहज उपलब्ध होंगे।
राजीव राय चुनाव जीतने के बाद विकास कार्यक्रम को कैसे चलाएंगे? ये भी देखने की बात होगी। अब,केंद्र में अगली सरकार इंडीगठबंधन की जगह ‘मोदी सरकार -3’ की वापसी लगभग तय हो चुकी है। घोसी को इसका कितना, कैसे फायदा मिलेगा? फ़िर से मोदी सरकार की वापसी में ये,किस तरह अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराएँगे? ये भी देखने की बात होगी। क्योंकि कल्पनाथ राय ने सारे विकास कार्य उनकी अपनी सरकार रहने के ही दौरान कराये है। बिना अपनी पार्टी की सरकार के क्षेत्र में विकास कार्य कराना काफ़ी दुरूह होता है। इसका जिक्र मऊ जिले के ही उत्तर प्रदेश सरकार में बिजली और नगर विकास मंत्री ए. के. राय शर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा भी है। ऐसे में देखा जाय तो राजीव राय के ऊपर जनता के कार्य कराने की महती जिम्मेदारी तो है ही साथ ही नयी योजनाओं को लेकर भी इनके दृष्टिकोण का काफ़ी बेसब्री से जनता को इंतज़ार रहेगा। क्योंकि कल्पनाथ राय के दिमाग़ में विकास के प्रोजेक्ट स्वतः इनस्टॉल होते थे। परिवहन, दूरसंचार, क़ृषि, शिक्षा, क्रमबद्ध रूप से उनकी बातों और योजनाओं में परिलक्षित होते थे। ऐसे में राजीव राय अब एक नयी भूमिका में आ चुके है। उन्हें अब चुनाव जीतने के बाद सरकारी प्रक्रिया में होने वाली देरी और उनसे निजात पाने के तरीके ख़ोज कर जनता को ये विश्वास दिलाना ही होगा कि वो कल्पनाथ राय के विकास के एजेंडे के सही वारिस है। इसके लिए वो जनता और सरकार के बीच एक सकरात्मक सेतु की तरह होंगे।जिससे विकास दिल्ली के जरिये घोसी तक आयेगा।एक अरसे से घोसी के अवाम की आवाज़ पार्लियामेंट में सुनी ही नहीं गयी है । न ही उसके दर्द और जरुरत को वहां किसी ने सही तरीके से पहुंचाया है।अब, उसने सही रहनुमा चुना है तो देखना है,उसकी आवाज़ किस अंदाज़ में वहां बयां होगी। उम्मीद बेहतरी की ही है और ये मुस्तकबील के लिए शायद जरुरी भी।

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