MDM में मशरुम को किसान सशक्तिकरण एवं बच्चो को स्वस्थ रखने की दिशा में अनोखी पहल
मऊ। बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन, कृषि विभाग तकनीकी सपोर्ट इकाई के पहल पर जिले में किसानों को मशरुम की खेती से जोडकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में जनपद मऊ में प्राथमिक एवं उच्च एवं कम्पोजिट विध्यालयों में मध्यान भोजन योजना अंतर्गत मशरूम आपूर्ति हेतु जिले के सी एच सी कामता (FPO) एवं जिला शिक्षा विभाग के मध्य एम०ओ०यू० हस्ताक्षरित किये जाने के प्रश्चात बदराव ब्लाक के चिंहित 25 प्राथमिक एवं कम्पोजिट विध्यालयों में मध्यान भोजन में मशरुम को शामिल कर लिया गया।
इसका शुभारम्भ दिनाक 3.02.2023 को प्रशांत नागर , मुख्य विकास अधिकारी के द्वारा कंपोजिट विद्यालय, ब्लॉक बडराव मैं किया गया। इस कार्यक्रम मैं मुख्य विकास अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी व अन्य अधिकारीगण ने मशरुम वाली तहरी का जायका लिया और इस मौके पर उन्होंने कहा की मशरूम में पोष्टिक तत्वों की प्रचूरता होती है, अतः इसके मध्यान भोजन में सम्मिलित होने से बच्चों को पोष्टिक आहार भी मिलेगा वही किसानों की आय दोगुनी होगी। जिले में किसानों द्वारा उत्पादित मशरूम की आपूर्ति एफ०पी०ओ० द्वारा विद्यालयों को की जाएगी। इसके साथ ही साथ एफ०पी०ओ० मशरूम का मूल्य संवर्धन करते हुए सदस्यों को बेहतर मार्केट दिलाने में प्रमुख भूमिका निभएगी।
पहले चरण में जनपद के बदराव ब्लॉक के 25 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विध्यालयों को जोड़ा गया है जिससे लगभग 5500 बच्चे लाभान्वित होंगे। योजना अंतर्गत बदराव ब्लाक को मशरुम ब्लाक के रूप में विकसित करने की योजना है।
ब्लाक में योजना के सफल सञ्चालन के उपरांत जिले के अन्य विकास खण्डों में भी मशरूम आपूर्ति पर विचार किया जायेगा। अतः किसानों को रोजगार का अवसर प्रदान करते हुए पुरे जिले के अन्य विद्यालयों के लगभग तीन लाख से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया जा सकता है।
इस मौके पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डॉ० संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इस पहल से विद्यालय में बच्चों के अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद की जाती है तथा इसके सकारात्मक परिणाम के उपरांत इसके उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा। जिसके आधार पर इसे जनपद के समस्त विकास खण्डों में संचालित करने पर विचार किया जायेगा।
इस मौके पर सी एच सी कामता (FPO) के मुखकार्यकारी मानवेदर प्रताप शाही ने बताया मशरुम में पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में होती है जिसे कम लागत में उत्पादन किया जा सकता है। इसे उगाने के लिए फसल अवसेश, पराली व भूसे का उपयोग किया जाता है। इससे पराली व फसल अवसेश का प्रबंधन होने के साथ आय भी बढती है।
इस मौके पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा० संतोष कुमार सिंह, (एफ०पी०सी०) के मानवेदर प्रताप शाही, उप क़ृषि निदेशक एस पी श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता जी उपस्थिति रहे।

