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केन्द्रीय मंत्री से मिले लघु उद्योग भारती के मंत्री, जीएसटी पोर्टल के संचालन को बताया जटिल, सरल बनाने की रखी मांग

मऊ। जीएसटी रिटर्न जो प्रत्येक माह में तीन बार भरा जाता है, उसे तीन माह के अंतराल पर केवल एक बार जीएसटी पोर्टल पर फाईल्ड करने की व्यवस्था की जाय। जीएसटी पोर्टल का संचालन अत्यंत जटिल है। इसे इतना आसान बनाया जाय कि प्रत्येक व्यापारी एवं उद्यमी स्वयं फाईल्ड कर सकें। जीएसटी पोर्टल से IGST, CGST व SGST को पूरी तरह से समाप्त कर केवल जीएसटी किया जाय। केन्द्र और राज्य के कर बटवारे में व्यापारियों को न उलझाया जाय। 28 प्रतिशत कर की स्लैब को समाप्त कर 5, 10, 15 प्रतिशत जीएसटी कर की स्लैब को लागू किया जाय। उपरोक्त मांग लघु उद्योग भारती मऊ के प्रतिनिधि मण्डल नें केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला से मिलकर की। लघु उद्योग भारती मऊ के मंत्री बालकृष्ण ठरड ने मंत्री से आग्रह किया कि क्षेत्र के समस्त व्यापारी बन्धु अत्यंत तनाव में है। पूरा समय केवल कागजों को तैयार करने एवं प्रतिमाह तीन रिटर्न फाईल्ड करने में व्यतीत हो रहा है। कारोबार से ध्यान हट चुका है। उत्पादन कम होकर 25 प्रतिशत के आस-पास रह गया है। यह परिस्थिति देश हित में नहीं है। व्यापारी सरकार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर देश के विकास हेतु जीएसटी देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। परन्तु पोर्टल की जटिलता एवं असंगत जीएसटी स्लैब के कारण अत्यंत परेशान है। पोर्टल में संशोधन का ऑपशन न होने के कारण बड़ी संख्या में फाईल्ड रिटर्न गलत है। अगले माह का रिटर्न भरने की स्थिति नहीं बन रही है। जीएसटी पोर्टल पर संशोधन का ऑपशन एक्टीवेट किया जाय। श्री भवानी शंकर नें बताया कि कम्पोजिट स्किम की सीमा को 75 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रूपया किया जाय तथा वे सभी सुविधायें उपलब्ध करायी जाये जो पंजीकृत व्यापारियों को मिल रही है। सौरभ मद्धेसिया नें बताया कि व्यापारी के प्रोफाईल एवं रिटर्न में पूर्व की भांति संशोधन नहीं किये जाने से व्यापारी न केवल तनाव में है बल्कि अवसाद की तरफ भी जा सकता है जो देश हित में नहीं है।
प्रतिनिधि मण्डल नें पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमेंट-कंक्रीट से बनने वाले चौखट, चौकी, डेस्क बेंच तथा बेंच बनाने वाली 200 से ज्यादा उद्योगों को जो कुटिर उद्योग के रूप में कार्यरत है, बन्द होने से बचाने का आग्रह किया। एक लिखित ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि इस उत्पाद पर 1 जुलाई 2017 से 28 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है। यह उत्पाद विलासिता की वस्तु में नहीं आता है, बल्कि बिजली एवं भारी मशीनों का प्रयोग न होने से गांव कस्बो में फैल रहा यह उद्योग रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण साधन है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सीमेंट की चौखट के उत्पादन एवं प्रयोग से लगभग 1 लाख 25 हजार पेड़ प्रति वर्ष कटने से बच रहे है। इस पर जीएसटी शून्य या निम्नतम 5 प्रतिशत आरोपित करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधि मण्डल की भावनाओं को सूनने एवं समझने के पश्चात मंत्री जी नें बताया कि एक माह के अन्दर पोर्टल को आसान बनाया जायेगा। जीएसटी संचालन में आ रही परेशानियों को दूर करने हेतु सुशील मोदी के नेतृत्व में एक कमेटी बनायी गयी है। उन्हें भी अपनी समस्याओं को जरूर भेजीये। आपके इस ज्ञापन पर गम्भीरता से विचार कर निर्णय लिये जायेंगे। प्रतिनिधि मण्डल में श्रीराम सिंह, प्रमोद परासर गोरखपुर से थे।

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