50 साल बाद जब टॉपर लौटा अपने पुराने स्कूल… भावुक हो गए अजीत सिंह
कभी जिस विद्यालय की कक्षा में बैठकर सपनों को आकार दिया, आज उसी विद्यालय के प्रांगण में खड़े होकर अपनी सफलता की कहानी सुनाना — यह पल किसी भी व्यक्ति के लिए अविस्मरणीय होता है। ऐसा ही भावुक क्षण तब देखने को मिला जब मऊ जिले के मूल निवासी अजीत सिंह अपने पुराने विद्यालय इन्टर कालेज, सरसेना, मऊ पहुँचे।

अजीत सिंह ने इसी विद्यालय से वर्ष 1973-75 में कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई की थी। उस समय यह विद्यालय एक मिडिल स्कूल था और आज़मगढ़ जनपद के अंतर्गत आता था। वर्ष 1975 की मिडिल स्कूल परीक्षा में अजीत सिंह ने पूरे जनपद में टॉप कर इतिहास रच दिया था।
सालों बाद जब वे अपने गृह जनपद के दौरे पर निकले, तो अपने पुराने विद्यालय जाने की इच्छा को रोक नहीं पाए। जैसे ही वे स्कूल परिसर में पहुँचे, पुरानी यादें ताज़ा हो उठीं — वही दीवारें, वही मैदान, वही कक्षाएँ… लेकिन समय बहुत आगे बढ़ चुका था।

विद्यालय में बच्चों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने अपनी जीवन यात्रा और शिक्षा यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे शुरुआती संघर्ष, मेहनत और अनुशासन ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। बच्चों ने भी बड़े उत्साह से उनकी बातें सुनीं।अजीत सिंह ने भावुक होकर कहा किजीवन में जो प्रारंभिक शिक्षा और अनुशासन उन्हें मिला,उसमें इस विद्यालय की अहम भूमिका रही है।
विद्यालय के शिक्षकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत और सम्मान किया। इस सम्मान और स्नेह को पाकर अजीत सिंह भावुक हो गए। उनकी आँखों में कृतज्ञता साफ झलक रही थी।
यह केवल एक पूर्व छात्र का विद्यालय आगमन नहीं था, बल्कि यह उस रिश्ते की पुनर्स्थापना थी जो गुरु, शिष्य और विद्यालय के बीच जीवनभर बना रहता है।
विद्यालय परिवार ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सम्मान पाकर वे भावुक हो उठे। उनकी यह वापसी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई कि छोटे विद्यालय से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।


