मऊ के यतीन्द्र को मुख्यमंत्री राज्य युवा पुरस्कार से करेंगे सम्मानित

■ पहली बार जनपद को मिल रहा
स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड

मऊ। परदहां विकास खण्ड के ग्राम इमिलिया डीह के रहने वाले यतीन्द्र पति पाण्डेय को राज्य स्तरीय युवा पुरस्कार स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। प्रदेश के 10 युवाओं को मिल रहे इस सम्मान में यतीन्द्र का नाम होने से लोग गदगद हैं।
बीएचयू के छात्र नेता रहे यतीन्द्र को जनपद में उनके अनूठे कार्यों से जाना जाता है कोरोना की पहली लहर में यतीन्द्र ने प्रवासी श्रमिकों व गरीबों के लिये भोजन वितरण का कार्य किया वहीं दूसरी कालरूपी महामारी में भी मजबूत हौसले से मऊ के अस्पतालों के चक्कर लगाते रहते थे अस्पताल में कमी दिखने पर तत्काल उसे ठीक करवाते थे। गंभीर कोविड मरीजों के लिये ऑक्सीजन सिलेंडर भी उपलब्ध कराया। यतींद्र ठंड में अमीरों से कम्बल दान लेकर गरीबों में बांटा करते हैं वहीं जानवरों के भोजन के लिये कई स्थानों पर रोटी बैंक की स्थापना भी की। यतीन्द्र जनपद के विकास के लिये हमेशा अग्रसर रहते हैं। पिछले वर्ष फरवरी में इन्होंने जनपद के विकास का मॉडल जिलाधिकारी को सौंपा था जिसमे इन्होंने कुसमौर में कृषि अनुसंधान केंद्र को कृषि विश्वविद्यालय व दोहरीघाट से बलिया तक जाने वाली चौधरी चरण सिंह कैनाल नहर को तमसा नदी से जोड़ने की बात कही थी। इसके साथ ही वनदेवी धाम व चिड़िया घर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया था। रोजगार के लिये बन्द पड़ी मिलों को चलाने की बात कही थी वहीं खेल के लिये स्पोर्ट स्टेडियम का आधुनिकीकरण कराकर वहां अंतरराष्ट्रीय मैच कराए जाने व पर्यटन के लिये नरजा ताल का सुंदरीकरण करा के वहाँ बोटिंग सुविधा उपलब्ध कराने पर बल दिया था । यतीन्द्र का सबसे उत्कृष्ट कार्य रहा वाराणसी में सड़क पर तख्ती लेकर भीख माँग रही अस्सी वर्षिय दलित वृद्ध महिला से भीख मांगने का कारण पूछा तो उसने बताया कि इकलौता बेटा है पेशे से ड्राइवर था फल लेकर काठमांडू जा रहा था रास्ते में ही सड़क दुर्घटना के झूठे मामले में मेरे बेटे को नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है वह 3 वर्ष से वहाँ की जेल में बंद है। यतीन्द्र तत्काल दिल्ली गए और नेपाल की जेल में बंद महेंद्र को राजनयिक मदद दिलाई । बाद में यतीन्द्र बुजर्ग माँ को लेकर भारतीय दूतावास काठमांडू चले गए वहाँ के अधिकारियों से बात की लेकिन लेकिन वहाँ रिहाई के लिये बात नहीं बनी । महेन्द्र की रिहाई के लिये नेपाल के कानून अनुसार हर्जाना 5 लाख रुपए देना था और भारत सरकार व्यक्तिगत रूप से आर्थिक मदद नहीं कर सकती। फिर यतींद्र नेपाल के कानून व विदेश मंत्रालय में भी गए और सांसद नारद मुनि राना से मदद माँगी। नेपाली सांसद ने मदद का भरोसा दिया। यतीन्द्र वापस भारत आये और वाराणसी के डीएम से मिले लेकिन बात वहां भी नहीं बन पाई। फिर यतीन्द्र मित्रों के सहयोग से बुजुर्ग माँ के बेटे की रिहाई के लिये आर्थिक मदद का अभियान चलाया और आधे हर्जाने की रकम जमा कर ली फिर नेपाली सांसद नारद मुनि राना के माध्यम से नेपाल के चौधरी फाउंडेशन द्वारा आधी रकम अदा करने की स्वीकृति दे दी गयी। यतींद्र बुजुर्ग दलित माँ को लेकर नेपाल निकल गए और तीन दिन की न्यायिक प्रक्रिया के बाद महेंद्र को रिहा कराकर भारत लाए। माँ और बेटे का मिलन हो गया। वापस आने पर मऊ व आसपास के जिलों के लोगों ने भव्यता से स्वागत किया और यतीन्द्र की कुशल रणनीति और नेतृत्व शैली की सराहना भी की गई। यतीन्द्र रामा विश्वविद्यालय कानपुर से पीएचडी कर रहे हैं ।
इनके पिता डॉ प्रवीण पति पाण्डेय चिकित्सक हैं व माता रीता त्रिपाठी । जूनियर हाई स्कूल मुहम्मदाबाद गोहना में प्रधानाध्यापिका हैं और बड़े भाई डॉ फणीन्द्र पति पाण्डेय
बीएचयू में वैज्ञानिक हैं। इस अवार्ड के लिये चयनिय होने पर मऊ के जिला युवा कल्याण अधिकारी कृष्ण मोहन पाठक, यतीन्द्र के शोध निर्देशक डॉ प्रणय सिंह , विभागाध्यक्ष डॉ आदित्य मिश्र बीएचयू के प्रो० ज्ञान प्रकाश मिश्र, प्रो० श्रद्धा सिंह और आईआईटी बीएचयू के प्रो० प्रदीप कुमार मिश्र ने शुभकामनाएं दीं।

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