लद्युकथा : मेरी जान
@ शब्द मसीहा केदारनाथ… “अरे! सुनती हो ।” पति ने कमरे में से ज़ोर से पुकारा ।“बहरी नहीं हुई हूँ
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@ शब्द मसीहा केदारनाथ… “अरे! सुनती हो ।” पति ने कमरे में से ज़ोर से पुकारा ।“बहरी नहीं हुई हूँ
Read More@ अंतिमा सिंह “गोरखपुरी”… मादक पवन लेके महकी है बगिया,दिन-दिन बढ़ती बसंत की बहार है।।बौर से लदाये बौराय गये आम्र-वृंद,झूम-झूम
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… “हेल्लो ! क्या मसीहा जी से बात हो रही है ?” किसी अनजान नंबर से फोन
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… कई वर्ष बाहर नौकरी करने के बाद पति वापिस काम करने अपने शहर लौटा। सुबह अपने
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… सुबह से दोपहर तलक वह सीढियों के पास बैठा रहा मस्जिद की , हिलाता रहा अपना
Read More@ राजीव कुमार, पटना, बिहार से… हालाँकि मुझे आध्यात्मिक विषयों पर किताबें पढ़ना ज्यादा पसंद हैं, किन्तु शिक्षक होने के
Read More@ शब्द मसीहा केदारनाथ… अंजना के पति अपने शिप पर दूर समंदर के बीच हिचकोले खा रहे थे। बेटी सुरम्या
Read More( शब्द मसीहा केदारनाथ ) नये वर्ष के उपलक्ष्य में रंगारंग प्रोग्राम था . गाँव से आए अपने पिता को
Read More( शब्द मसीहा केदारनाथ ) बहू-बेटे और बेटियाँ पने-अपने घर को गए थे। गगन की तबीयत भी अब ठीक नहीं
Read More( शब्द मसीहा केदारनाथ ) सुबह-सुबह बहू को चिल्लाते सुना तो दर्शन लाल रज़ाई से बाहर निकले। “तुम्हें अपना हर
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