पुरुष रोते नही है, पिघलते ज्वार भाटे से, उफनते भावनाओं को, हलाहल पी जाते है
@ मान बहादुर सिंह “मानु”… पुरुष रोते नही हैपिघलते ज्वार भाटे सेउफनते भावनाओं कोहलाहल पी जाते हैशंकर सा _पुरुष रोते
Read More
@ मान बहादुर सिंह “मानु”… पुरुष रोते नही हैपिघलते ज्वार भाटे सेउफनते भावनाओं कोहलाहल पी जाते हैशंकर सा _पुरुष रोते
Read More