“कान्हा रसमाधुरी”

@ किशोर कुमार धनावत…

ओ मनमोहन! मुरली वाले,
तेरा तन नीला बाल काले।
तेरे होठों की शोभा निराली,
दोनों नयन बड़े मतवाले।
सिर पर मोर मुकुट सोहे,
पैरों में पायरिया खनके।
वंशी की धून जब सुनती,
गोपियन के पांव ठनके।
अब और सहा नहीं जाता,
मेरे मन में भरदो उजाला।
अंतस में विरह व्यथा है,
दे दो प्रेम का एक निवाला।
१३-५-२०२२

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