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वीर भूमि गाजीपुर जैसा जज्बा मैने आज तक नहीं देखा, यहाँ से कई अब्दुल हमीद पैदा होंगे: थल सेनाध्यक्ष

गाजीपुर। देश के थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत ने वीर अब्दुल हमीद की जन्मभूमि गाजीपुर से उनके शहादत दिवस पर सम्बोधित करते हुए कहा कि इस वीर भूमि जैसा जज्बा मैने आज तक नहीं देखा, इस धरती के युवाओं का उत्साह यह साबित करता है कि यहाँ से कई अब्दुल हमीद पैदा होंगे। परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद की गाथा प्रेरणा दायक है जो नवयुवकों को प्रेरणा प्रदान करेगी। मै इस धरती को प्रणाम करने आया हूँ। उन्होनें अपनी बाते रविवार को अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर उनके गाँव धामूपुर में आयोजित शहादत समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा।विपिन रावत ने कहा कि परमवीर चक्र विजेता भारत पाक युद्ध 1965 के नायक वीर अब्दुल हमीद की गाथा अत्यंत प्रेरणादायक है, जो नवयुवकों को जज्बा प्रदान करेगी। मुझे यकीन है इस भूमि से कई नौजवान आगे आएंगे और परमवीर की गाथा यहीं समाप्त होने वाली नहीं है।  मैं इस पवित्र धरती को नमन करने आया हुआ हूं। उन्होंने बताया कि 1954 में सेना में भर्ती हुए वीर अब्दुल हमीद ने 1962 में चीन के साथ हुई युद्ध में भी भाग लिया था लेकिन उन्हें 1965 भारत पाकिस्तान युद्ध में अपना जौहर दिखाने का मौका मिला। लगातार 7, 8, 9 और 10 सितंबर तक अजय समझे जाने वाले पैटन टैंक का सामना कर रहे शहीद अब्दुल हमीद ने केवल पाकिस्तान का ही नहीं वरन पूरे विश्व का दंभ चूर किया और हम इस युद्ध में विजेता रहे। हमने अपना लाल खो दिया गर्व है हमें अब्दुल हमीद पर।अपने संबोधन के दौरान उपस्थित नौजवानों के उत्साह को देखकर उन्होंने गाजीपुर जनपद में शीघ्र ही सेना भर्ती की व्यवस्था कराने की बात कही, इस समारोह में विपिन रावत ने 1965 से लगाया तमाम युद्ध में गाजीपुर जनपद सभी शहीदों के परिजनों वीर नारियों को नमन किया वह उन्हें सम्मानित करते हुए शहीदों को नमन किया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महामहिम राम नाईक ने कहा की परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद की जन्म भूमि को प्रणाम करने का अवसर प्राप्त हुआ, यह मैं अपना सौभाग्य समझता हूं। उन्होंने कहा कि अब तक पूरे देश में मात्र 21 लोगों को परमवीर चक्र प्राप्त हो सके हैं, जिनमें से गाजीपुर के अब्दुल हमीद यह जनपद ही नहीं बल्कि प्रदेश के लिए अभिमान की बात है। इस पवित्र भूमि पर अब्दुल हमीद की जन्मभूमि उनके परिजनों व तमाम शहीदों के परिजनों को प्रणाम प्रणाम करता हूं। मैं आप की भूमि को प्रणाम करने आया हूं। 1965 में पाकिस्तान ने धोखे से हमला किया जिसे दम्भ था अमेरिकी पैटन टैंक का। जो उस समय अजेय माना जाता था। लेकिन गाजीपुर के माटी के लाल अब्दुल हमीद ने सीमित संसाधन में एक-दो नहीं बल्कि 4 पैटन टैंक ध्वस्त कर पाकिस्तान के मंसूबे को बहुत ही नहीं किया बल्कि पूरे विश्व में भारत के अदम्य साहस और वीरता का लोहा मनवाया। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने रसद आपूर्ति की कमी की व्यवस्था देखते हुए भारतीय संस्कृति का सहारा लेकर लोगों से उपवास का आह्वान किया जो कहीं न कहीं सफल रहा। ऐसा वीर बहादुर कभी-कभी पैदा होता है।
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि एक सैनिक की सर्वश्रेष्ठ इच्छा देश की रक्षा के साथ ही अगर उसे शहादत का अवसर मिले तो अपना सौभाग्य समझता है। आज हम अपने घरों में आराम की नींद इसलिए ले पाते हैं क्योंकि सैनिक हमारी मजबूती के साथ रखवाली करते हैं। मेरा सेना के साथ विशेष जुड़ा रहा है, कारगिल युद्ध के समय 449 जवान शहीद हुए उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी को मैंने पेट्रोलियम मंत्री की हैसियत से सभी शहीदों के परिवारों को एक एक पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी देने का सलाह दिया। जिसे प्रधानमंत्री जी ने तत्काल मानते हुए मुझे ऐसा करने का आदेश दिया जिसे मैं अपना सौभाग्य समझता हूँ।
थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत ने भी शहीदों को किया नमन। उन्होंने बताया कि वीर अब्दुल हमीद के शहादत समारोह की जानकारी होने पर हुए अपने को रोक न सकी और कार्यक्रम में शामिल होने के बहाने शहीदों को नमन करने चली आई।
सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत द्वारा 1965 से 1971 तक के गाजीपुर जनपद के सभी शहीद परिवार को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए उनके साथ भोजन भी किया गया।इस अवसर पर सेना द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वही नेहरू युवा केन्द्र, वेलफेयर क्लब व भोजपुरी फिल्म कलाकार दिनेश यादव “निरहुआ” द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में नेहरू युवा केन्द्र संगठन गाजीपुर की उपनिदेशक डा0 कुमारी ज्योत्स्ना, लेखाकार सुभाष चन्द्र प्रसाद, राज्य प्रशिक्षक पारसनाथ सिंह यादव एवं नागेन्द्र कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।

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